जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी का सच, जानिए- यूपी के लड़कों की अापबीती

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युवक ने बताया कि आतंकवादियों पर सैन्य कार्रवाई के दौरान सेना के जवानों का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें पत्थरबाजी करने जाने का दबाव बनाया जाता था।

कश्मीर के पुलवामा में फैक्ट्री मालिक की कैद से भागे बागपत और सहारनपुर जिले के छह युवकों में से एक से पूछताछ जारी है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस ने एक युवक को पूछताछ के लिए कोतवाली तलब करने की बात स्वीकार की है। सूत्रों से पता चला है कि पूछताछ में युवक ने बताया कि आतंकवादियों पर सैन्य कार्रवाई के दौरान सेना के जवानों का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें पत्थरबाजी करने जाने का दबाव बनाया जाता था, इसके लिए उन्हें एक विशेष कुर्ता दिया जाता था। वह लोग एक बार पत्थरबाजी करने भी गए।

खुफिया विभाग ने पूरे मामले से लखनऊ को अवगत कराया है। उधर, केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। सूत्रों ने बताया कि उप्र के बागपत जिले के बड़ौत नगर के गुराना रोड पर रहने वाला नसीम पूछताछ में बार-बार बयान बदल रहा है। इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि एक युवक तहरीर लेकर आया था। उससे असलियत का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि नसीम समेत बागपत और सहारनपुर जिले के छह युवक तीन माह से कश्मीर के पुलवामा में एक फैक्ट्री में बंधक बने हुए थे। सोमवार को नसीम और उसके साथियों ने इसका राजफाश करते हुए आपबीती सुनाई थी। सभी ने बताया था कि पुलवामा में फैक्ट्री में सिलाई का काम करते थे, लेकिन फैक्ट्री मालिक उन्हें मजदूरी नहीं देता था और आतंकवादियों पर कार्रवाई के दौरान सेना के जवानों पर पत्थरबाजी करने के लिए उकसाता था। ऐसा न करने पर उनको हथियारों से डराया धमकाया और मारा पीटा जाता था। दबाव में आकर एक दिन वह पत्थरबाजी करने के लिए गए थे, लेकिन वह खड़े रहे और उसके बाद वापस आ गए।
युवकों को पुलवामा ले जाने वाले युवक की तलाश
पूछताछ में नसीम ने बताया कि उन्हें कई माह पहले बागपत जिले के अमीनगर सराय का रहने वाला एक युवक कश्मीर में काम दिलाने के नाम पर पुलवामा ले गया था और वहां पर फैक्ट्री मालिक से मिलवाने के बाद वापस आ गया था। फैक्ट्री मालिक उन पर अब भी कश्मीर बुलाने का दबाव बना रहा है।

एक युवक हिरासत में, चार अन्य साथियों की तलाश जारी

कश्मीर के पहलगाम में भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने वाले गैंग में सहारनपुर के पांच युवक भी शामिल थे। पुलिस ने एक युवक को हिरासत में ले लिया है, जबकि चार की तलाश जारी है। युवक ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बाद हरकत में आई पुलिस ने नानौता के मोहल्ला चाह मंजली निवासी मोहम्मद अजीम पुत्र हसीबुर्रहमान को हिरासत में ले लिया है। अजीम कश्मीर के पहलगाम से चंद रोज पहले ही लौटा है। पूछताछ में अजीम ने बताया कि वह सिलाई-कढ़ाई जानता है।

रोजगार के लिए बड़ौत के रहने वाले अपने बहनोई सहित चार रिश्तेदारों के साथ इसी साल जनवरी में पहलगाम गया था। इनके साथ नकुड़ के रहने वाले अंकित, आसिफ, बबलू व पंकज भी थे। अजीम की मानें तो पहलगाम में सिलाई के बजाए उन्हें सेना पर पत्थरबाजी करने को कहा गया। मना करने पर मारपीट की गई। मजबूरी में सभी ने सेना पर पथराव करना शुरू कर दिया। एलआइयू के सीओ सुधीर तोमर ने बताया कि एक युवक को हिरासत में लिया गया है। नकुड़ में रहने वाले इसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।

पत्थरबाजों को पाकिस्तान से फंडिंग

खुफिया रिपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों की तफ्तीश में पाया गया कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान, अलगाववादियों और दूसरे स्रोतों के जरिए सुरक्षाबलों के खिलाफ पथराव की फंडिंग (आर्थिक मदद) कर रहा है।

राज्य में राज्यपाल शासन

राज्य में आतंकवाद और कट्टरपंथी ताकतों के उभार के साथ ही कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बीच भाजपा ने मंगलवार को पीडीपी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल एनएन वोहरा की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को मुहर लगाई, इसके बाद राज्य में अगले छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।

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