तनाव में देश – अंत मौत ‘बंद लिफाफे में छुपा था 6 लोगों की मौत का रहस्य’

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देश = सुरक्षा
देश = घटना
देश = आजादी
देश = संस्कृति
ये कुछ शब्द है जो देश को अपना बनाते है और देश को आगे बढाते है. लेकिन कर्ज, रुपयों की कमी आदी कुछ ऐसी समस्या से गरीब लोग आगे नही निकल पाते और अपनी मौत को गले लगा लेते है. साथ ही समस्याओं का जो अंबार देश में लगा हुआ है. सरकार उससे गरीबों को निकालने के लिए कई योजनाएं चलाती है. कई कार्य करती है. लोगो को जागरुक करती है कि आप अपना पैसा कही वेस्ट ना करे. लेकिन फिर भी लोगो पर उनकी बात का असर नही होता और सरकार अपनी योजनाओं को सही तरीके से लोगो को नही समझा पाती. हम इसमें दोनो को (सरकार और जनता) दोषी मानते है. क्योकी ताली एक हाथ से नही बजती. ताली को बजाने के लिए दोनो हाथों की जरुरत होती है.

दिल्ली की जनता के जहन में दिल्ली में हुई 11 लोगो की मौत का मंजर अभी निकला भी नही था की अब एक और ऐसी ही घटना हजारीबाग में सामने आई. जहा एक ही परिवार के 6 लोगो ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. क्योकी उन घटनाओं में हर किसी ने अपने को खोया है. क्योकी जब किसी का कोई अपना घटना में मारा जाता है तो फिर एक दुख मन में लग जाता है. फिर चाहे वो आत्महत्या हो या फिर हत्या लोगो को सहमा देने वाले कांड़ देश में लगातार हो रहे है. पुलिस को घर के अंदर से एक सुसाइड नोट भी मिला है. हालांकि यह सुसाइड नोट भी अपने आप में विचित्र है. क्योकी पुलिस के कहे अनुसार हजारीबाग के खजांची तालाब के नजदीक सीडीएम अपार्टमेंट के एक फ्लैट वह परिवार रहता था. उसकी मिली जानकारी के अनुसार सभी लोगो ने खुदकुशी नही की. उनमें से तीन सदस्यों की हत्या की गई जबकी तीन लोगो ने सुसाइड़ की.

पुलिस ने उन मृतकों की पहचान नरेश अग्रवाल, महावीर माहेश्वरी, किरण अग्रवाल, प्रीति अग्रवाल, अन्वी अग्रवाल और अमन अग्रवाल के रुप में की है. शुरुआती जांच में मौत की वजह कर्ज बताया जा रहा है. लेकिन हत्या की आशंका से भी इसमें इनकार नही किया जा सकता है. हत्या करने के तरीके में भी निर्ममता बरती गई. इस हत्या में परिवार के 6 लोगो में से 2 लोगों ने फांसी लगाकर जान दी. एक बच्चे की धारदार हथियार से हत्या की गई. जबकी एक बच्ची को जहर देकर मारा गया. साथ ही एक महिला की गला दबाकर हत्या की गई. वही एक ने छत से कूद कर अपनी जान दी। आखिर इनकी मौत ने दिल्ली को ये सोचने पर मजबूर कर दिया की आखिर देश में गरीबी के कारण एक बार फिर किसान ने तो नही लेकिन किसी और ने जरुर अपनी जान दी.

पुलिस को परिवार के अपार्टमेंट के कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ. ये सुसाइड नोट एक ब्राउन लिफाफे पर गणित के किसी फोर्मूले की तरह गढ़ा हुआ था. साथ ही सुसाइड नोट लिखने वाले ने मौत की शुरुआती वजह ‘कर्ज’ और आखिरी कारण भी कर्ज ना दे पाने के कारण दिमाग में उपजे तनाव को बताया. मिले हुए सुसाइड़ नोट पर लोल स्याही से अलग से एक नोट भी लिखा गया था.

उस लिफाफे में लाल स्याही से गढ़ा हुआ है की ‘ अमन को लटका नहीं सकते थे. इसलिए उसकी हत्या की गयी. ‘ इसके नीचे नीली स्याही से मोटे और गाढ़े अक्षरों में सुसाईड़ नोट लिखा है. और नीचे लिखा है, बीमारी+ दुकान बंद+ दुकानदारों का बकाया ने देना + बदनामी + कर्ज = तनाव( टेंशन,प्रेशर) = मौत

सोचने वाली बात यह थी की वहा अपार्टमेंट में तीन सुसाइड़ नोट मिले. एक पॉवर ऑफ एटॉर्नी भी मिली. बेटे को फांसी के फंदे से नही लटका सके तो उसे छत से धक्का देकर नीचे फेंक दिया.

तनाव में अपनी जान देना कही भी किसी भी तरीक से ठीक नही है. हा हम कह सकते है की तनाव में स्थिति थोड़ी गंभीर जरुर होती है. लेकिन मौत का रास्त अपनाना किसी भी तरीके से सही नही है. देश जिस तरह से तरक्की की और अग्रसर होता जा रहा है. वही दुसरी और उसी तरक्की में गरीबों की पिसाई होती जा रही है और गरीब ही उनकी चक्की में पिसते जा रहे है. आखिर कब रुकेगी ये चक्की और कब कम होगी लोगो के मरने की संख्या और कब कम होगा तनाव में मौत का ये आकड़ा।

लेखक : रौनक पारीक (एंकर,IBA News Network)

(ये लेखक के निजी विचार हैं इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नही है)

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