माफिया डॉन बजरंगी की बागपत जेल में हत्या, सिर में मारी 10 गोलियां

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बागपत : रंगदारी के मामले में झांसी से बागपत आए मुन्ना बजरंगी की जेल में 10 गोलिया मार कर दी गई। जेल में हुई हत्या से जेल के साथ पुलिस प्रसाशन में हड़कंप मचा है। अधिकारियों के साथ वकीलों ने भी जेल पर डेरा डाल रखा है।

2 साल पूर्व बड़ौत के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित में पूर्वांचल के कुख्यात मुन्ना बजरंगी पर रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। सोमवार को बागपत कोर्ट में पेशी के लिए रविवार रात ही बजरंगी को सुरक्षा के बीच झांसी से बागपत जेल भेजा गया था।

सूत्रों के मुताबिक रविवार सुबह करीब छह बजे आधा दर्जन गोलिया चलने को आवाज आई कुछ देर बाद बजरंगी के हत्या का शोर जेल में गूंज उठा। हत्या से जेल प्रशासन में हड़कम मचने के साथ लखनऊ तक का प्रशासन हिल गया।

जानकारी मिलते ही डीएम ऋषिरेंद्र, एसपी जयप्रकाश भारी पुलिस बल के साथ जेल पहुंचे। सुरक्षा को जेल के चप्पे चप्पे पर भारी पुलिस तैनात रहे। वही अधिवक्ताओं ने भी जेल को घेरे रखा। अधिवक्ता के मुताबिक मृतक को सिर में 10 गोलियां मारी गई है। शव को गटर में डाला गया था।

इस हत्याकांड के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेलर को सस्पेंड करने के साथ ही न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जेल में इस तरह की घटना गंभीर मामला है। हम इसकी गहराई से जांच करेंगे और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

हत्या की आशंका जताई थी 

अधिवक्ता के मुताबिक मुन्ना की पत्नी ने कुछ दिन पहले ही लखनऊ कोर्ट में पति की बागपत में हत्या होने की आशंका जताते हुए पेशी पर नही भेजे जाने की मांग की मांग की थी। आरोप है कि हत्या करने के लिए ही बागपत बुलाया गया था। कहा कि बागपत सीजेएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नही कराई।

कौन है मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे। मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। उसने 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी और किशोर अवस्था तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे। मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था।

यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा। वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया।

अस्सी के दशक में की थी पहली हत्या

मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। उसके मुंह खून लग चुका था, इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया।

कभी 7 लाख का इनामी बदमाश था मुन्ना

भाजपा विधायक की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी। इसलिए उस पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। उस पर हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामलों में शामिल होने के आरोप थे। वो लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा। पुलिस का दबाव भी बढ़ता जा रहा था।

मुंबई में ली थी पनाह

यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी। उसका यूपी और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था। दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं था। इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया। उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा। इस दौरान उसका कई बार विदेश जाना भी होता रहा। उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे। वह मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश दे रहा था।

राजनीति में आजमाई किस्मत

एक बार मुन्ना ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की। मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे। यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहे थे। बीजेपी से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा। वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया।

ऐसे गिरफ्तार हुआ था मुन्ना

उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे। वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था। उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं, लेकिन 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी।

मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था। बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया। तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा है। इस दौरान उसके जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे मामले भी सामने आते रहे हैं। मुन्ना बजरंगी का दावा था कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की हैं।

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