36 साल बाद भारत लौटा गजानंद, बॉडर पार करते ही लड़खड़ाते कदमों से बैठ गया जमीन पर

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जयपुर। 36 साल से पाकिस्तान की लाहौर जेल में बंद जयपुर के गजानंद शर्मा आखिरकार सोमवार दोपहर को अपनी सरजमीं पर लौट आए। उन्होंने पंजाब की बाघा बॉर्डर से भारत की सरजमीं पर कदम रखा। देश की आजादी के पर्व से ठीक पहले गजानंद के लिए सोमवार का दिन भी किसी आजादी या नए जन्म से कम नहीं है। बॉडर पार करने के बाद गजानंद धीरे-धीरे कदमों से चलकर भारत की सीमा में प्रवेश किया फिर थक कर एक बार जमीन पर बैठ गए।

36 साल से लावारिस की तरह पाकिस्तान की लाहौर जेल में बंद गजानंद शर्मा आखिरकार सरज़मीं लौट रहा है। उसके हिंदुस्तान की धरा पर कदम रखने में अब बस पल भर का ही वक्त बचा है। पत्नी, बेटे-बहू और पोते-पोतियां होने के बावजूद भी गजानंद 36 बरस से पाक जेल में बंद रहा। देश की आज़ादी के पर्व से ठीक पहले गजानंद शर्मा के लिए सोमवार का दिन भी किसी आज़ादी या नए जन्म से कम नहीं है।

शर्मा के परिवार की दुआओं और प्रदेश के कुछ जनप्रतिनिधियों की पहल के चलते पाकिस्तान जेल में बंद गजानंद शर्मा की रिहाई संभव हो पाई है। गजानंद शर्मा पंजाब की बाघा बॉर्डर से भारत की सरजमीं पर कदम रखेंगे। हालांकि भारतीय दूतावास की प्रक्रिया के चलते शर्मा को परिवार के सुपुर्द नहीं किया जाएगा। दूतावास की प्रक्रिया के बाद 14 या फिर 15 अगस्त को ही गजानंद शर्मा जयपुर पहुंच पाएंगे। हालांकि सांसद रामचरण बोहरा ने बॉर्डर पर अपने प्रतिनिधि के तौर पर पंजाब के विप्र फाउंडेशन के अध्यक्ष सहदेव शर्मा को गजानंद शर्मा को लेने भेजा है। सहदेव शर्मा अपनी टीम के साथ बॉर्डर पर गजानंद से मुलाकात करेंगे फिर उसके बाद दूतावास कर्मचारी शर्मा को अपने साथ ले जाएंगे। उधर, पाकिस्तान ने गजानंद शर्मा को छोडऩे का एलान कर दिया।

सभी का अहसान रहा पिता को लाने में गजानंद शर्मा के बेटे मुकेश ने कहा कि पिता की तलाश में कहां-कहां नहीं भटके। सांसद रामचरण बोहरा, सभी समाज और समुदाय के लोगों की दुआ, सामाजिक संगठनों का सहयोग और मीडिया ने हमारी आवाज आगे तक पहुंचाई। सभी का अहसान है। सोमवार को पिता गजानंद भारतीय सीमा में आ जाएंगे। लेकिन कुछ कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें हमारे सुपुर्द किया जाएगा।

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