कानपुर मेडिकल कालेज में आइसीयू का एसी फेल, पांच मरीजों की मौत

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अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में ही बेहतर काम कर पाने वाला लाइफ सपोर्ट सिस्टम 41.2 डिग्री तापमान में चरमरा गया। सिस्टम के उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया।

भीषण गर्मी में लाला लाजपत राय अस्पताल (एलएलआर-हैलट) के मेडिसिन विभाग के इंसेटिव केयर यूनिट (आइसीयू) के दोनों एसी प्लांट बुधवार रात फेल हो गए। हर तरफ से बंद कमरे में सांस लेने के लिए आइसीयू की खिड़की तक खोलनी पड़ी। अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में ही बेहतर काम कर पाने वाला लाइफ सपोर्ट सिस्टम 41.2 डिग्री तापमान में चरमरा गया। सिस्टम के उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया। ऐसे में एसी फेल होने के 24 घंटे के भीतर यहां भर्ती पांच मरीजों की मौत हो गई।

हालांकि अस्पताल प्रशासन ने एसी बंद होने के कारण मौत होने से इन्कार किया है और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर असर न पडऩे का दावा किया है। बता दें, गुरुवार को कानपुर का अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मेडिसिन विभाग के इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) के दोनों एसी प्लांट पांच दिनों से गड़बड़ थे। सिस्टर इंचार्ज की लिखित शिकायत भी गंभीरता से नहीं ली गई और बुधवार देर रात एसी फेल हो गए। गर्मी एवं उमस बढऩे पर आइसीयू की खिड़कियां और दरवाजे खोलने पड़े।

मरीजों को राहत देने के लिए तीमारदार हाथ से पंखा झलते रहे। इस दौरान बुधवार रात 12 बजे से गुरुवार शाम पांच बजे तक पांच मरीजों की मौत हो गई। दो मरीजों की मौत बुधवार रात को हुई, जिन्हें परिजन लेकर चले गए। गुरुवार सुबह हरदोई के संडीला निवासी रसूल बख्श (58) व उन्नाव के एक मरीज ने दम तोड़ दिया। आइसीयू के बेड 12 पर भर्ती आजमगढ़ निवासी मुरारी (56) की शाम 5.20 बजे मौत हो गई।

‘आइसीयू में लाइफ सेविंग सपोर्ट सिस्टम में शामिल एबीजी मशीन और वेंटीलेटर 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही कार्य करते हैं। तापमान अधिक होने पर इन मशीनों का थर्मोस्टेट (तापमान) गड़बड़ा जाता है और ये काम नहीं कर पाती हैं। आइसीयू में गंभीर मरीज ही भर्ती होते हैं। लाइफ सेविंग सपोर्ट सिस्टम के सही से काम न करने पर मरीजों की मौत तक हो सकती है। एसी खराब होने से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। इनका संक्रमण मरीजों की हालत गंभीर कर सकता है।
– डॉ. सपन गुप्ता, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट एवं ईएमओ उर्सला अस्पताल

‘आइसीयू में गंभीर मरीज ही भर्ती होते हैं। अति गंभीर मरीजों की ही मौत हुई है। इन मौतों का एसी से कोई लेना देना नहीं है। हां, मेडिसिन आइसीयू का एसी प्लांट बुधवार से खराब है। प्रमुख अधीक्षक, सीएमएस व जूनियर इंजीनियर को सूचित कर दिया है। प्लांट की मरम्मत के लिए प्रयास जारी है। समस्या पता चल गई है। दोबारा जले कंप्रेशर को ठीक होने में एक दिन का और समय लगेगा। गर्मी से वेंटीलेटर एवं अन्य उपकरण प्रभावित नहीं हुए हैं। सभी ठीक ढंग से काम कर रहे हैं।
– डॉ. नवनीत कुमार, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

एसी प्लांट पांच दिनों से गड़बड़ 

मेडिसिन विभाग के इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) के दोनों एसी प्लांट पांच दिनों से गड़बड़ थे। सिस्टर इंचार्ज की लिखित शिकायत को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। बुधवार रात एसी ने काम करना बंद कर दिया। गर्मी एवं उमस बढऩे पर आइसीयू की खिड़कियां और दरवाजे खोल दिए गए। मरीजों को राहत देने के लिए तीमारदार हाथ से पंखे झुलाते रहे। बुधवार रात 12 बजे से गुरुवार शाम पांच बजे तक पांच मरीजों की मौत हो गई। इनमें दो मरीजों की मौत बुधवार रात में ही हुई थी जिन्हें परिवारीजन लेकर चले गए। गुरुवार सुबह हरदोई के संडीला निवासी रसूल बख्श (58) व उन्नाव के एक मरीज ने दम तोड़ दिया। आइसीयू के बेड 12 पर भर्ती आजमगढ़ निवासी मुरारी (56) की शाम 5.20 बजे मौत हो गई।  

एसी फेल होने से मौतें नहीं

मेडिसिन आइसीयू प्रभारी सौरभ अग्रवाल ने बताया कि आइसीयू में गंभीर मरीज ही आते हैं। एसी फेल होने की वजह से मौतें नहीं हुई हैं। हालांकि आइसीयू के एसी प्लांट कई दिनों से खराब हैं। शिकायत के बाद भी ध्यान नहीं दिया गया। जब बुधवार रात प्लांट ने काम करना बंद कर दिया तब सुबह मरम्मत का कार्य शुरू हुआ। मेडिकल कालेज के जेई विद्युत विनय अवस्थी ने बताया कि आइसीयू में दो एसी प्लांट लगे हैं। बुधवार को ठेकेदार के कर्मचारी आए थे। खराब मोटर मरम्मत के लिए ले गए थे। सुबह मोटर की मरम्मत की गई लेकिन, लगाते ही मोटर जल गई। शुक्रवार सुबह तक प्लांट ठीक होने की उम्मीद है।

आइसीयू का तापमान बढ़ने से चरमराए सपोर्ट सिस्टम

आइसीयू का तापमान निर्धारित मानक से अधिक होने पर लाइफ सपोर्टिग सिस्टम पूरी तरह चरमरा गए। गंभीर मरीजों की जान पर बन आई। वहीं अस्पताल प्रशासन एसी फेल होने के बावजूद लाइफपोर्टिग सिस्टम चालू होने का दावा करता रहा, जबकि एबीजी मशीन बंद हो गई थी। वहीं, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। १एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन आइसीयू में मरीज तब पहुंचते है, जब उनके शरीर पर सभी प्रकार की दवाएं एवं एंटीबायोटिक का प्रयोग हो चुका होता है। ऐसे में उन्हें आइसीयू में वेंटीलेटर की ही जरूर पड़ती है। वैसे भी आइसीयू में गंभीर मरीज ही आते हैं।

आइसीयू में वेंटीलेटर पर भर्ती मरीजों के रक्त में आक्सीजन एवं कार्बन डाइ आक्साइड की मात्र का पता लगाने के लिए आर्टिरियल ब्लड गैस (एबीजी) जांच कराई जाती है। उर्सला अस्पताल के इमरजेंसी क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ का कहना है कि एबीजी जांच के माध्यम से हर चार घंटे पर रक्त में आक्सीजन व कार्बन डाइआक्साइड के स्तर का पता लगाया जाता है। उसके हिसाब से वेंटीलेटर सेट किया जाता है। निर्धारित मानक से अधिक तापमान होने पर आइसीयू की व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। एबीजी बंद हो जाती है और वेंटीलेटर भी। ऐसे में मरीजों को दिक्कत होना स्वाभाविक है।

एलएलआर की इमरजेंसी में जिंदगी से खिलवाड़
एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल एलएलआर (हैलट) खुद सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। यहां का इमरजेंसी वार्ड हो या फिर दूसरे वार्ड, मरीजों को परेशानी से दो चार होना ही पड़ता है। गंभीर मरीजों का इलाज होने के बाद भी इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन सक्सन की व्यवस्था तक नहीं है। यहां के मेडिसिन, सर्जरी और आथरेपेडिक विभाग में भी आक्सीजन की पाइपें लगी हैं पर उससे आपूर्ति नहीं होती। इमरजेंसी में मरीजों को जुगाड़ से आक्सीजन दी जा रही है। आक्सीजन का प्रेशर मापने के लिए घड़ी तक नहीं है। यहां इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का पल्स, ब्लड प्रेशर और आक्सीजन की स्थिति जानने के लिए मल्टी पैरा मॉनीटर भी नहीं हैं।

एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन पांच हजार और इमरजेंसी में सौ से डेढ़ सौ मरीज आते हैं। यहां पर नगर के अलावा हमीरपुर, महोबा, कानपुर देहात समेत १० जिलों के लोग इलाज के लिए आते हैं। आसपास कहीं भी हादसा होने पर घायलाें को यहीं पर भर्ती कराया जाता है। बावजूद इसके अस्पताल में इमरजेंसी सुविधाएं नहीं बढ़ पा रही हैं। हादसों में घायल होने वाले तमाम लोग गंभीर रूप से जख्मी होते हैं, उन्हें आक्सीजन की जरूरत होती है।

उन्हें सिलेंडर से आक्सीजन दिया जाता है। मेडिकल कालेज और अस्पताल प्रबंधन शायद गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से हुई दर्जनों बच्चों की मौत की घटना भूल गया है। प्रबंधन आक्सीजन की आपूर्ति प्लांट से नहीं करा पा रहा है। अगर दुर्भाग्यवश आक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने वाला ठेकेदार किसी दिन आपूर्ति न कर पाया तो यहां बड़ी घटना हो सकती है। बावजूद इसके इतनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।

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