…तो इस वजह से बिहार को नहीं दिया जा सकता विशेष राज्य का दर्जा

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नई दिल्ली : आज भारत के कुल 29 राज्यों में से 11 को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है, और कम से कम पांच राज्य विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की गुहार समय-समय पर केंद्र सरकार से कर चुके हैं. इनमें बिहार भी शामिल है, जहां BJP खुद भी सत्ता में है. इस मांग को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी ज़ोर-शोर से उठाते भी रहे हैं. इस समय भारत के 11 राज्यों – असम, जम्मू एवं कश्मीर, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और उत्तराखंड – को विशेष राज्य का दर्जा हासिल है, और पिछले कुछ सालों में बिहार के अलावा आंध्र प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और गोवा ने विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की है.

आइए, आज आपको बताते हैं – क्या है विशेष राज्य का दर्जा, क्यों राज्य इस दर्जे की मांग करते हैं, विशेष राज्य का दर्जा मिल जाने से किसी राज्य को क्या-क्या फायदा होता है, यह दर्जा किस राज्य को दिया जा सकता है, और सबसे अहम सवाल – बिहार को यह दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता.

UPA के शासनकाल के दौरान केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी दी थी कि विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने का मुद्दा सबसे पहले राष्ट्रीय विकास परिषद की अप्रैल, 1969 में आयोजित बैठक के दौरान ‘गाडगिल फॉर्मूला’ के अनुमोदन के वक्त उठा था. सबसे पहले वर्ष 1969 में ही असम, जम्मू एवं कश्मीर और नागालैंड को यह दर्जा दिया गया था. इसके बाद अगली पंचवर्षीय योजना के दौरान यह दर्जा पांच और राज्यों – हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा – को भी दे दिया गया. फिर 1990 में दो और राज्यों – अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम – को यह दर्जा दिया गया, तथा वर्ष 2001 में उत्तराखंड के गठन के साथ ही उसे भी विशेष राज्य का दर्जा दे दिया गया.

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