Published On: Fri, Mar 30th, 2018

वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है भीमकुंड, आपदा से पहले देता है ऐसे संकेत

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छतरपुर । आज यदि लोग किसी भी रहस्यमयी चीज को देखते हैं तो सबसे पहले उसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जानने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब कोई वैज्ञानिक कारण नहीं मिल पाता है तो वे सच में उसे प्रभावित करने लगती है। चूंकि विज्ञान तय सिद्धांतों पर ही चलता है, लेकिन आध्यात्म और चमत्कार का कोई सिद्धांत नहीं होता है और भारत में ऐसे रहस्यमयी स्थानों की कमी नहीं है, जो आज भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ बनी हुई है।

ऐसी ही रहस्यमयी जगहों में से एक है मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक भीमकुंड, जिसकी गहराई आज तक कोई नहीं जान सका है। इस कुंड का जल भी साफ और पीने योग्य है।

ऐतिहासिक तीर्थस्थल है भीमकुंड

आदिकाल से छतरपुर का भीमकुंड प्रसिद्ध तीर्थस्थान रहा है। यह कई ऋषियों, मुनियों व तपस्वियों की साधना का केंद्र रहा है। लेकिन बीते कुछ दशकों से यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ वैज्ञानिकों के शोध केंद्र के रूप में भी विकसित होते जा रहा है। इसका कारण है भीमकुंड की रहस्यमयी गहराई, जो आज तक नापी नहीं जा सकी है।

थक कर वापस आ जाते हैं गोताखोर

भीमकुंड की गहराई नापने के लिए इसमें कई बार गोताखोरी भी कराई गई लेकिन हर बार गोताखोर इसमें नाकाम साबित होते हैं। कोई भी गोताखोर आज तक इस रहस्यमयी कुंड की तली तो छू नहीं पाया है। एक नामी रिसर्च चैनल की टीम ने भी एक बार अपनी टीम को यहां भेज कर शोध कराना चाहा लेकिन शोधकर्ताओं की टीम इसकी गहराई नहीं पता कर पाई।

कुंड में कभी कम नहीं होता पानी

देखने में बिल्कुल सामानय लगने वाले भीमकुंड की एक खासियत यह भी है कि भरपूर उपयोग के बाद भी इस कुंड का पानी कभी कम नहीं होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार यहां वाटर पंप लगाकर भी कुंड को खाली करने की कोशिश की गई लेकिन पानी का लेवल कम नहीं हुआ। वैज्ञानिक शोध के दौरान यह भी नहीं पता लगा पाए कि आखिर लगातार इसमें पानी कहां से आ रहा है।

प्राकृतिक आपदा से पहले बढ़ जाता है जल

ऐसी मान्यता भी है कि जब-जब कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा घटित होती है, तो उसके संकेत भीम कुंड में देखने को मिल जाते हैं क्योंकि विपदा से पहले भीमकुंड का जलस्तर अचानक बढ़ने लगता है। नोएडा और गुजरात में आए भूकंप के दौरान भी यहां का जलस्तर बढ़ा था। सुनामी के दौरान तो कुण्ड का जलस्तर करीब 15 फीट ऊपर तक आ गया था। इसलिए स्थानीय लोग यहां प्राकृतिक आपदा की आशंका पहले ही लगा लेते हैं।

पुराणों में भी भीमकुंड का उल्लेख

भीमकुंड का ऐतिहासिक महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि इसका उल्लेख भारत के वैदिक ग्रंथ पुराणों में भी किया गया है। इसके अलावा धार्मिक मान्यता भी है कि अज्ञातवास के दौरान जब एक बार भीम को प्यास लगी तो पानी नहीं मिलने पर अपनी गदा से उन्होंने जमीन पर जोर से गदा मारी, जिससे यहां पानी निकलने लगा। इसी कुंड को बाद में भीमकुंड के नाम से जाना जाने लगा।

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