फूलों की घाटी में फोटोग्राफी का मजा लेना है, तो घूम आइए उत्तराखंड के चमोली

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प्राकृतिक प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग के समान है। इस घाटी में सबसे अधिक संख्या में जंगली फूलों की किस्में देखी जा सकती हैं।

अगर आपको नेचर के बीच फोटोग्राफी करना पसंद है।  तो हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर आप शानदार फोटोग्राफी कर सकते हैं। यहां फूलों की घाटी में घूमना और यहां फोटोग्राफी करना एक अलग तरह का एक्सपीरियंस रहेगा। उत्तराखंड में हम आपको सैर करवाएंगे चमोली की। चमोली जनपद की प्रसिद्ध तीर्थ स्थली बद्रीनाथ धाम के पास गंधमादन पर्वत पर स्थित फूलों की घाटी या वैली ऑफ फ्लावर्स। आइए जानते हैं यहां क्या है खास।

सांखरी जोहर

पुरौला से आगे है सांखरी जोहर की दून का बेस कैंप है। यहां तक बसें और टैक्सियां आती हैं। इसके बाद शुरू होती है लगभग 35 किमी।  की ट्रैकिंग यानी पद यात्रा। यह खांई बद्यान क्षेत्र कहलाता है और यहां के सीधे-सादे निवासी अब भी आधुनिक सुख-सुविधाओं से वंचित हैं।  सांखरी में आपको पोर्टर और गाइड मिल जाएंगे और आप रात्रि विश्राम के बाद सुबह अपनी रोमांचक यात्रा शुरू कर सकते हैं।

गोपेश्वर

गोपेश्वंर शहर में तथा इसके आस-पास बहुत सारे मंदिर है।  यहां के प्रमुख आकर्षण केन्दों में पुराना शिव मंदिर, वैतामी कुंड आदि है।

फूलों की घाटी 

प्राकृतिक प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग के समान है। इस घाटी में सबसे अधिक संख्या में जंगली फूलों की किस्में देखी जा सकती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा के लिए यहां से संजीवनी बूटी लेने के लिए आए थे।  इस घाटी में पौधों की 521 किस्में हैं। 1982 में इस जगह को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित कर दिया गया था।  इसके अलावा यहां आपको कई जानवर जैसे, काला भालू, हिरण, भूरा भालू, तेंदुए, चीता आदि देखने को मिल जाएंगें।

कैसे पहुंचे

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जोलीग्रांड है।  यह चमोली से 221 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल और अल्मोड़ा सभी जगह से चमोली के लिए बसें चलती है।

घूमने के लिए बेस्ट टाइम

नवम्बर से जून

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