फिल्म रिव्यू: बच्चों को पसंद आएगी ‘बागी 2’ की मार-धाड़

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भारतीय सिनेमा के दर्शकों ने नायक का खलनायक से इंतकाम लेते ढेरों फिल्मों में देखा है। एक अकेला नायक 10-10 गुंडों को पीटता हुआ 80 के दशक से देखते आ रहे हैं! इसी श्रंखला में एक मजबूत नायक को लेकर बनी थी बागी! बागी की सफलता ने फिल्म के निर्माताओं को उत्साहित किया और उसका सीक्वल बना बागी 2।

हॉलीवुड की मशहूर फिल्म रेंबो का भारतीयकरण किया गया! एक अकेला नायक दुश्मनों की फौज से अकेला भीड़ जाता है! सैकड़ों गुंडों को कुचलते हुए खलनायक के चिथड़े बिखेर देता है और अपने मकसद में कामयाब हो जाता है, यही कहानी है बागी2 की! रणवीर प्रताप सिंह फौज में कमांडो है वह निडर है बहादुर है देश भक्त भी।वह देश के लिए अपनी जान देने में भी पीछे नहीं हटता! ऐसे में एक दिन रणबीर को पूर्व प्रेमिका की एक चिट्ठी मिलती है जिसमें लिखा होता है कि वह किसी मुसीबत में है और उसके पास रणवीर के अलावा कोई विकल्प नहीं है! जाहिर है हमारा हीरो वहां जाता है वह उसे कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है लेकिन, अंततः उसे जीत मिलती है।

निर्देशक अहमद खान ने सिर्फ स्टंट्स और गानों पर ज्यादा ध्यान दिया अगर स्टोरी में थोड़ी से लॉजिक का इस्तेमाल हो जाता तो फिल्म साधारण फिल्म से कहीं ऊपर की फिल्म होती। फिल्म में एक्शन सीक्वेंस इस लाजवाब है कई बार आपको उसमें लॉजिक का अभाव नजर आता है! कई बार आपको लगता है कि गुंडे अहिंसा धर्म का पालन करते हैं वह खुद होकर किसी पर हाथ नहीं उठाते हालांकि वीडियो गेम्स की तरह दिखने वाले एक्शन सीक्वेंस इस बच्चों को जरूर पसंद आएंगे।

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