जून से आपको महंगा पड़ेगा नई कार खरीदना, जानें 3 बड़े कारण

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ऑटो सेक्टर के लिए माल ढुलाई और ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि एक आखिरी वजह होती है जिसकी वजह से कार निर्माता कंपनियां अपने तमाम मॉडल्स की कीमतों में वृद्धि करती हैं

नई दिल्ली (अंकित दुबे)। हाल ही में हुंडई मोटर इंडिया ने क्रेटा फेसलिफ्ट को छोड़कर अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में 2 फीसद का इजाफा करने का फैसला किया किया है। यानी अब जून 2018 से हुंडई की गाड़ियां 50,000 रुपये तक महंगी हो जाएंगी। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मारुति सुजुकी भी बढ़ते इनपुट कॉस्ट के चलते अगले महीने से अपने मॉडल्स की कीमतों में 5,000 से 25,000 रुपये तक बढ़ोतरी कर सकती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या हुंडई और मारुति के अलावा दूसरी कंपनियां भी अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है? इस बारे में देश के जाने माने ऑटो एक्सपर्ट टू टू धवन ने जागरण ऑटो से खास बातचीत में तीन कारण बताए हैं। उन्होंने बताया है कि किन वजहों से कार कंपनियां आने वाले महीनों में अपनी गाड़ियों की कीमतें कुछ फीसद तक का इजाफा कर सकती हैं।

कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि

टू टू धवन ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार पिछले छह महीनों से वृद्धि देखने को मिल रही है। ऐसे में घरेलू कार निर्माता कंपनियां नए साल पर और नए वित्त वर्ष से कीमतें बढ़ाने के बाद एक बार फिर इनपुट लागत को कम करने के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर सकती हैं।

माल ढुलाई और ईंधन की कीमतों में वृद्धि

ऑटो सेक्टर के लिए माल ढुलाई और ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि एक आखिरी वजह होती है जिसकी वजह से कार निर्माता कंपनियां अपने तमाम मॉडल्स की कीमतों में वृद्धि करती हैं। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (IFTRT) के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में डीजल की लगातार कीमतें बढ़ने के चलते ट्रकों का भाड़ा 2 से 2.5 फीसद बढ़ गया है। ऐसे में माल ढुलाई की कमी के चलते पिछले महीने के दौरान ट्रक रूट पर 4.5 से 5.5 फीसद तक गिरावट देखी गई है। इसी वजह से कार कंपनियों के लिए माल भाड़े में बढ़ोतरी भी अपने मॉडल्स के दाम बढ़ाने की एक वजह हो सकती है।

ऑटो कम्पोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी की बढ़ोतरी

कई कार कंपनियों के कम्पोनेंट्स भारत में इंपोर्ट किए जाते हैं और ये ज्यादातर विदेशी कंपनियां करती हैं क्योंकि इनके कम्पोनेंट्स विदेशों में ही बनाए जाते हैं। ऐसे में इंजन, इंजन के कम्पोनेंट्स गियरबॉक्स और ट्रांसमिशन शाफ्ट्स की कस्टम ड्यटी बढ़ाकर 15 फीसद कर दी गई है, जो कि बीते वित्त वर्ष 5 से 10 फीसद था। वहीं, मोटर वाहन (ट्रक्स और बसों) के कंप्लीट्ली बिल्ट यूनिट्स (CBU) पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी 20 से बढ़ाकर 25 कर दी गई है। ऐसे में जर्मनी की कार कंपनियों ने पहले ही चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी थी, लेकिन अब दूसरी तिमाही में कंपनी यह कदम फिर उठा सकती है।

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